“मै नही भूला...!!!”
Friday, February 11, 2011
“मै नही भूला...!!!”
न जाने क्यू अतीत की उस कर्कश आहट को नजरअन्दाज कर दिया गया है...???सही भी है और न ही ‘मै’ चाहता कि इसे नजरअन्दाज न किया जाये.लेकिन डरता हू तो बस ‘अतीत’ और ‘वर्तमान’ के बीच पैदा हो चुके फासलो पर स्थित उन ‘मील के पत्तथरो’ से जो मै कर चुका था तय मगर समय के तूफान ने धकेल दिया मुझे पीछे,डरता हू तो बस लोगो की उस असमन्वयकारी प्रश्नावली से जो बेताब रहती है मेरे अतीत की दीवारो पर छपे हुये निशानो की धुन्धली निशानी को पुनः अपने प्रश्नो से उजागर करने मे और हताशा की गर्त मे क्षनिक धक्का देने मे.अन्त मे थक-हारकर ये सोचने पर विवश हो ही जाता हू कि मेरे जीवनरूपी ‘सितार’ का वो कौन सा तार मुझसे जुदा हो गया है जो मेरे वर्तमान परिप्रेक्ष्य की लय को बिगाड रहा है...???शायद नही जानता मै...!!!बस हँस लेता हू कभी अपने अतीत की इस दगाबाजी पर और बस ये सोचकर रह जाता हू कि ये जिन्दगी भी कितनी अजब होती है ना...जब आपको खुद से उम्मीद होती है तो कोई आपसे उम्मीद नही करता और जब सब आपसे उम्मीद करने लग जाते है तो पता नही क्यू आपकी खुद आपसे ही उम्मीद नही रह जाती.हाँ माना कि खो गया हू मै उलझनो मे, कश्मकशो के अन्धेरो मे...मगर एक बात और एक अहसास जो नही खोया मैने और जो अभी भी मुझे याद है,वो सिर्फ इन शब्दो का साथ है... वो सिर्फ इन शब्दो का साथ है... “मै नही भूला...!!!”... “मै नही भूला...!!!”
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